भोजन के लिए भूख हड़ताल ।
आज विश्व भर में अधिकांश ऐसे राष्ट्र है जिन्होंने इस बात पर सबसे अधिक महत्व दिया कि समाज को बेहतर बनाने की दिशा में सबसे अधिक सराहनीय कार्य कौन से हैं। जब भी राष्ट्र के लिए कोई "कट्टरपंथी समाज", "विचारधारा" और व्यक्ति चुनौती बन जाता हो, ऐसे में राजनीति को चाहिए कि देश और "अन्य समाज" के हित में ऐसे फैसले लिए जाएं जिनके नतीजे भले ही दूरगामी ना हो परंतु समाज के अन्य सभी वर्गों के हित में हो। क्या हमने भारत में ऐसी राजनीतिक व्यवस्था कहीं भी देखी है। नहीं, हमने तो भारत को भोजन के लिए भूख हड़ताल करते देखा है और अक्सर देखते हैं। क्या हमने रोटी के लिए बच्चों को सड़कों पर भीख मांगते नहीं देखा है। क्या हमने एंबुलेंस के अभाव में मरीज को कंधों पर जाते नहीं देखा है। क्या हमने राजनीतिक अव्यवस्था के कारण लाखों लोगों को पैदल अपने घर की तरफ जाते नहीं देखा।